कभी‑कभी दर्द सबसे ज्यादा उन्हीं लोगों से मिलता है, जिन पर हम सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।
यहाँ आपको मिलेंगी गहराई से लिखी गई अपने ही गद्दार शायरी जिनमें छिपा है धोखे, दर्द और अपनेपन के टूटने का सच्चा एहसास। यह शायरी केवल शब्द नहीं, बल्कि टूटे हुए दिलों की आवाज़ हैं।
अपने ही गद्दार शायरी

जो अपने थे वही पीठ में खंजर घोंप गए,
बेगानों की क्या बिसात, वो तो नमक चाट गए।
साथ चलने का वादा कर धूल में छोड़ गए,
अपने ही थे जो हर मोड़ पर धोखा दे गए।
चेहरों पर मुस्कान, दिल में ज़हर छिपा था,
अपने ही निकले जो सबसे बड़ा सज़ा था।

हाथ थामे थे जिन्होंने, वही धकेल गए,
अपनापन दिखाकर दिल के टुकड़े कर गए।
सच कहूं तो ग़म बेगानों से नहीं,
दर्द तो अपने ही गद्दारों ने दिया कहीं।
भरोसा किया था जिन पर खुद से ज़्यादा,
वही काट गए रिश्ता एक इशारा ज़रा सा।

जो दर्द दिया अपनों ने, वो ज़हर बन गया,
पर मुस्कुराना सीखा, यही सफ़र बन गया।
अपने ही निकले बेवफ़ा, किसे इल्ज़ाम दूँ,
आईना देखूं तो बस खुद को सलाम दूँ।
गिराने की साज़िश अपनों ने रची थी,
पर उठने की ताक़त भी उन्हीं से मिली थी।

जिसको समझा सहारा, वही तूफ़ान निकला,
जो अपना था वही सबसे अंजान निकला।
ज़ख्म अपनों ने दिए, मरहम भी नहीं दिया,
उम्मीद तोड़ी, पर सबक सिखा दिया।
जो आँखों में वफ़ा का दिया जलाते थे,
वही रातों में साज़िशें रचाते थे।

अपने ही जब गद्दार बन जाएँ,
तो परायों में सुकून नज़र आए।
वो जो कहते थे “हम हैं तेरे”,
वही निकले सबसे घातक तेरे।
अपनों की मुस्कान के पीछे तलवार थी,
वफ़ा की ओट में गद्दारी की दीवार थी।

हम तो अपनों पर यक़ीन कर बैठे थे,
वो तो हमें ही ज़मीन कर बैठे थे।
जिसने साथ निभाने की बात कही थी,
उसी ने पीठ पीछे वार किया था।
चेहरे पर दुआ, दिल में दगा रखते थे,
ये अपने थे जो दुश्मनों से सख्त निकले थे।

गद्दार अपने ही थे, दर्द भी गहरा था,
पर सबक वही, अब दिल भी सहरा था।
अपने निकले गद्दार, अब कोई गिला नहीं,
जले तो रिश्ते, मगर सिला नहीं।
जो कभी हँसते थे मेरी ख़ुशी में,
वही आज जश्न मनाते हैं मेरी कमी में।

गले लगकर जो खंजर चलाते हैं,
वही अपने कहलाते हैं।
ज़ुबान पे मिठास, पर दिल में छलावा,
यही तो है अपनों का ग़लत रवैया।
वफ़ा का दावा करने वाले, दगा दिखा गए,
अपने थे, इसलिए दिल को रुला गए।

अपने ही जब दर्द के सौदागर निकले,
हर मुस्कुराहट में आँसू ठहर गए।
जिनसे उम्मीद थी हाथ थामने की,
वही ठोकरें मार गए राह में।
अपने गद्दारों ने जो रंग दिखाया,
दुश्मन भी होता तो दिल ना दुखाया।

हर ग़म से बढ़कर ग़म अपनों का होता है,
गद्दार अपना हो तो ज़ख्म गहरा होता है।
अपने ही जब चालें चलने लग जाएँ,
तो वक़्त भी ठहर कर देखे हालात के साए।
गद्दारी की इन्तिहा तब हुई,
जब अपने ही पराए लगने लगे सभी।
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तो दोस्तों! हमें उम्मीद है कि दी गई अपने ही गद्दार शायरी ने आपके दिल को छू लिया होगा और आपको वो जुड़ाव महसूस कराया होगा जिसकी तलाश आप कर रहे थे।
कभी‑कभी शब्द ही वो ज़रिया बन जाते हैं जिनसे दर्द भी खूबसूरत लगने लगता है – और यही Shayari Read की खासियत है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अपने ही गद्दार शायरी क्या होती है?
अपने ही गद्दार शायरी वे शायरियां होती हैं जो उन लोगों के धोखे और दर्द को बयां करती हैं जिन पर कभी हमें सबसे ज्यादा भरोसा था। यह शायरी दिल की गहराइयों से निकले सच्चे जज़्बातों को शब्द देती है।
2. इस तरह की शायरी पढ़ने से क्या फायदा होता है?
ऐसी शायरी दिल का बोझ हल्का करती है, भावनाओं को समझने में मदद देती है और यह महसूस करवाती है कि आप अकेले नहीं हैं — हर दिल ने ऐसा दर्द महसूस किया है।
3. क्या Shayari Read पर रोज नई अपने ही गद्दार शायरी मिलती है?
हाँ, Shayari Read पर हर दिन नई और यूनिक शायरियां अपलोड की जाती हैं ताकि आपको हर दिन कुछ नया और relatable पढ़ने को मिले।
4. क्या मैं अपनी खुद की शायरी भेज सकता हूँ?
बिलकुल! आप अपनी लिखी हुई शायरी हमें भेज सकते हैं। अगर वह हमारे readers से जुड़ती है, तो हम उसे वेबसाइट पर प्रकाशित भी कर सकते हैं।
5. क्या ये शायरियां कॉपीराइट‑फ्री हैं?
साइट पर मौजूद सभी शायरियां ओरिजिनल या उचित क्रेडिट के साथ प्रकाशित की जाती हैं। बिना अनुमति किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर इनका इस्तेमाल न करें।
6. अपने ही गद्दार शायरी सबसे ज्यादा किन लोगों को पसंद आती है?
यह शायरी उन पाठकों को पसंद आती है जिन्होंने कभी अपने सबसे करीबी से धोखा या दूरी का दर्द महसूस किया हो।
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